आँसू
खुशी में भी आँसू हैं,
दुख में भी आँसू हैं।
जैसे सिक्के के दो पहलू,
वैसा ही है केवल दिल।
सही बात जानता है
मनुष्य की भावना।
कभी उठती है, कभी गिरती है,
बिना किसी सहारे।
आँसू ऐसे ही बनते हैं,
कभी भी आ जाते हैं।
मित्र की तरह
सबके पास पहुँच जाते हैं।
— अमन्दा
