गीत/नवगीत

हमारे साथ ना चल पाएगा

सच से भय लगता है जिसको

जिसने चाहा लूट लिया है।

हमने सब स्वीकार किया है।

खट्टे मीठे अनुभव अपने,

पल-पल हमने खूब जिया है।

नहीं किसी से हमें षिकायत।

पढ़ी बहुत थीं, हमने आयत।

हमको अपनी धरती प्यारी,

नहीं जाना है हमें विलायत।

साथ हमारे जो भी आया।

हमने उसको गले लगाया।

हम हैं राही राह ही प्यारी,

राह ने ही बस साथ निभाया।

साथ हमारे कौन चलेगा?

कष्टों से झोली कौन भरेगा?

अभावों में हम आनंद पाते,

प्रेम की खातिर कौन सहेगा?

सुविधाओं से प्रेम है जिसको।

धन का कोष प्रिय है जिसको।

हमारे साथ ना चल पाएगा,

सच से भय लगता है जिसको।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)