वक्त बदलते वक्त नहीं लगता
सूरज ढला,
पर उजाला ठहरा,
मन अब भी जागे।
पत्तों की धुन,
कहती है चुपके से,
कुछ भी स्थिर नहीं।
घड़ी की सुई,
चलती रही आगे,
सपने पीछे।
फूल झरे तो,
खुशबू रह गई,
यादों की तरह।
समय का स्पर्श,
हर चेहरे पर लिखे,
नई कहानी।
बादल बहे,
राहों को धोते,
भोर मुस्काई।
कल की परछाई,
आज में घुलती,
जीवन नवा।
रुकना चाहो भी,
वक्त नहीं रुकता,
नदी सिखाती।
हर परिवर्तन में,
एक सीख छिपी है,
सहना सीखो।
मन का दर्पण,
समय को देखे,
खुद बदल जाए।
वक्त की चाल,
धीमी पर गहरी,
अर्थ उभरते।
पल जो बीते,
गीत बन जाएं,
जीवन सुने।
— डॉ. अशोक
