गीत/नवगीत

रखना जीवन में सदा

रखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।
दृढ़ निश्चय विश्वास से, ऊंची रहे उड़ान।

छू लेना आकाश को, कर सपने साकार।
हिम्मत के बल वेग से, दे सुंदर आकार।
नया करें जग में यहाॅं, हो अपनी पहचान।
रखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।

आत्मसात सद्गुण करें, कर्म धर्म के साथ।
जन हित सेवा भाव को, रखना अपने हाथ।
वचन निभाता जान से, होता वही महान।
रखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।

झुकके रहना प्यार से, कर सबका सत्कार।
छोटी छोटी बात पर, करें नहीं तकरार।
करता नहीं गुमान है, वह सच्चा इंसान।
रखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।

मान बड़ों का कीजिए, करें नहीं अपमान।
छोटे से नित प्यार कर, फर्ज यही तू जान।
पावन करना कर्म है, बनती इस से शान।
रखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।

— शिव सन्याल

शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995