गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर खुशी ही मनाना नये साल में।
नफ़रतें सब मिटाना नये साल में।।

आज पाने सफलता बढ़े ही चलो।
साध लें हम निशाना नये साल में।

कर्म ही नेक हों नाम बढ़ता सदा।
धर्म अपना निभाना नये साल में।।

हो सभी का भला है यही कामना।
प्रेम सबसे जताना नये साल में।।

छू सकें आसमां यत्न ऐसा करो।
है सभी को बढ़ाना नये साल में।।

ज़ख़्म देना नहीं अब किसी को कभी।
सोच संकल्प उठाना नये साल में।।

देख मचलें कभी खूब अरमान जब।
तिश्नगी ही बुझाना नये साल में।।

दोस्ती भी दिखाती नयी राह ही।
नित्य मिलना-मिलाना नये साल में।।

जो अजनबी खड़ा द्वार आकर अभी।
भोज उसको कराना नये साल में।

मुफ़लिसी में गुज़ारें उन्हीं हेतु ही।
( कुछ नया कर दिखाना नये साल में। )

ज़िंदगी में गलत हो कभी कुछ सुनो।
तीर तुम मत चुभाना नये साल में।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’