लघुकथा

लघुकथा – शीना

पाँचवी कक्षा में पढ़ती शीना को उसकी टीचर मिनू ने पूछा चार बज रहे है बेटा कोई लेने नहीं आया घर पर फ़ोन कर दू?
उदास चेहरा लेकर शीना बोली,”मुझे घर नहीं जाना है।”
मिनू जी बोली,”ऐसा क्यों बोल रही हो? मम्मी-पापा लेने नहीं आए इसलिए उनसे नाराज़ हो?”
शीना गंभीर होकर बोली,”ऐसा कुछ नहीं है पर मिनू जी समझ गई कुछ तो गड़बड़ है ।”
उन्होंने पूछा,”बताओ बेटा घर क्यों नहीं जाना है?”
शीना कुछ नहीं बोली,बस चुपचाप खड़ी रही।
मिनू जी ने कहा,ठीक है मैं तुम्हारे घर पर फ़ोन करती हूँ।
रोते हुए शीना बोली,”घर पर फ़ोन ना करे,मम्मी नहीं है।”
मिनू जी बोली,”तो क्या हुआ बेटा आपके पापा तो होंगे ना?”
शीना घबराकर और ज़्यादा रोने लगी।
मिनू जी को हाथ जोड़ते हुए बोली, “घर में पापा अकेले है इसलिए तो मुझे घर नहीं जाना है।”
पापा जैसे दिखते है वैसे है नहीं इसलिए टीचर मुझे घर नहीं जाना है ……

— अनुपमा प्रधान

अनुपमा प्रधान

पिता - स्वर्गीय अर्जुन प्रधान प्राइमेरी शिक्षिका, आर्मी पब्लिक स्कूल हैप्पी वैली 37 Jhalupara Cantt East Khasi Hills Shillong, Meghalaya 793002 मोबाइल 8729987292 ईमेल anupamapradhan43855@gmail.com शैक्षिक योग्यता MA.BED English, BA Hindi Assam Rashtra Bhasha dwara