उषा जगी प्राची में भोली
उषा जगी प्राची में भोली।
लगा भाल पर अरुणिम रोली।।
भानु जगाया उठो चलो अब,
जाग उठे खगदल हमजोली।
चह- चह कर खग चहक रहे हैं,
सुना – सुना कर मधुरिम बोली।
गोला लाल उठा जब ऊपर,
लगा खेलता अंबर होली।
कुकड़ – कुकड़ कूँ करते मुर्गे,
निकल पड़ी बतखों की टोली।
उधर गली के उस नुक्कड़ पर,
बालक खेल रहे हैं गोली।
‘शुभम्’ सुबह का दृश्य मनोहर,
जग कर्ता ने निधियाँ खोली।
— डॉ. भगवत स्वरूप ‘शुभम्’
