कविता

तुम केवल तुम नहीं

तुम केवल तुम नहीं
तुम किसी समाज के अंग हो
तुम केवल तुम नहीं
तुम किसी व्यवसाय के संग हो
तुम्हारी हर हरकतों से
प्रभावित होता परिवार भी
सोचा कभी बुरे कर्मों से
झुकेंगे रिश्तेदार भी
इसलिए तुम केवल तुम नहीं
ये समझना होगा हर इंसान को
जो आकर बैठ जाता अंदर हमारे
मारना होगा उस शैतान को
सुकर्म की सीढ़ी चढ़ोगे
तो पूजे जाओगे
लोगों के मन- विचारों में
स्थान पाओगे
इसलिए कहती कलम
क्या ग़लत और क्या सही
तुम केवल तुम नहीं…

~ व्यग्र पाण्डे

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)322201