मसरूफ की हदें जरूरी है
मसरूफ पलों में
रुकना भी सीख लेना
साँस का सम्मान
काम की धुन में
दिल की आवाज़ न खो
यही संतुलन
हर व्यस्तता
अनमोल नहीं होती
सीमा जरूरी
थकी घड़ी भी
विश्राम माँग लेती
समय समझे
मसरूफ रहना
जीवन नहीं, साधन है
जीना भी कला
— डॉ. अशोक
मसरूफ पलों में
रुकना भी सीख लेना
साँस का सम्मान
काम की धुन में
दिल की आवाज़ न खो
यही संतुलन
हर व्यस्तता
अनमोल नहीं होती
सीमा जरूरी
थकी घड़ी भी
विश्राम माँग लेती
समय समझे
मसरूफ रहना
जीवन नहीं, साधन है
जीना भी कला
— डॉ. अशोक