कर दो उजाला
मोह मद का धागा जुड़ा है मानव मन से
ये मन तो है बड़ा चंचल लोभी मतवाला,
हे मॉं शारदा करूॅं मैं विनती ज्ञान प्रकाश
भीतर जगाकर अधंकार में कर दो उजाला ।
दिन-रात सपनों के पीछे बस हूॅं भागता,
चाहुॅं-चाहुॅं कितना चाहुॅं ये तो नहीं जानता,
जकड़ा हूॅं बुरी तरह सुख-दुख के बंधन में,
अबोध अज्ञानी भटका हुआ हूँ ये जानता,
बहाकर पिपासु मन में ज्ञान गंगा निर्मल
पिला दो जीवन “आनंद” अमृत प्याला ।
तुम हो दयामयी वागवादिनी मातु जगदम्बा,
करूणा की मूरत जगदिश्वरी ललिता अंबा,
फॅंसा हूॅं निकलू कैसे घिरा मैं तो उलझन में,
दिखाओ तुम्ही राह कोई रास्ता बहुत लंबा,
मिटाकर भय शोक चिंता मन कर दो विमल
जगा दो मेरे जीवन में प्रेम संगीत सुरीला ।
मोह मद का धागा जुड़ा है मानव मन से
ये मन तो है बड़ा चंचल लोभी मतवाला,
हे मॉं शारदा करूॅं मैं विनती ज्ञान प्रकाश
भीतर जगाकर अधंकार में कर दो उजाला ।
— मोनिका डागा “आनंद”
