कमजोर व्यक्ति को आज़ादी
छोटे कदम बढ़ाए
अँधेरे में भी रोशनी
मन ने दी हिम्मत
सपनों की उड़ान
भूल न सके अपने भय
हवा से बातें करें
नदी की लहरों में
धीरे-धीरे बहता जज़्बा
मौन भी सिखाता है
पेड़ों की सरसराहट
छिपे गीत सुनाती है
स्वयं की खोज में
सूरज की पहली किरण
छू ले दिल के कोने
नई राह दिखाती है
चाँद की शीतल छाया
तन-मन को थामे रखे
शांति में शक्ति है
पक्षियों की उड़ान
सीख देती है धैर्य
हर सुबह नई शुरुआत
बादलों की ओट में
छिपे रहस्य उजागर
हिम्मत न खोए कभी
सर्द हवाओं में भी
अंदर का अंगारा जले
असली स्वतंत्रता यही
अंत में स्वयं से
मिलकर मुस्कुराना सीख
मन का उत्सव बने
— डॉ. अशोक
