गीत
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ।
गौरी गौशाला से जुड़कर सेवा धर्म निभाओ।
गौमाता के ऋण से कैसे उऋण तुम हो पाओगे।
नारायण की सेवा तुम गौ सेवा में पा जाओगे।
महादान है दान गाय का, महिमा जिसने जानी।
जीवन उसका स्वच्छ निरंतर ज्यों सरयू का पानी।
संरक्षण कर गौमाता का नेक कर्म कर जाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..
तन की गगरी लेकर घूमे कितने पापों को ढोया।
भाग्य स्वयं के अनजाने में शूल निरंतर ही बोया।
गौ माता की सेवा करना धर्म यही सिखलाता है।
वेद पुराणों का है कहना सुख सेवा से आता है।
गौमाता की सेवा कर लो पग में शीश झुकाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..
सतयुग में पार लगाया था कलयुग में पार लगाएगी।
महानरक की वैतरणी से पार गाय करवाएगी।
पर तारण के हित हेतु ही नरक भोगती आई है।
रही भटकती, कचरा खाती, और कहने को माई है।
कामधेनु है कामधेनु पर गुंजन दया दिखाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..
— गुंजन अग्रवाल अनहद
