गीत/नवगीत

गीत

हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ।
गौरी गौशाला से जुड़कर सेवा धर्म निभाओ। 

गौमाता के ऋण से कैसे उऋण तुम हो पाओगे। 
नारायण की सेवा तुम गौ सेवा में पा जाओगे। 
महादान है दान गाय का, महिमा जिसने जानी। 
जीवन उसका स्वच्छ निरंतर ज्यों सरयू का पानी।
संरक्षण कर गौमाता का नेक कर्म कर जाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..

तन की गगरी लेकर घूमे कितने पापों को ढोया।
भाग्य स्वयं के अनजाने में शूल निरंतर ही बोया। 
गौ माता की सेवा करना धर्म यही सिखलाता है।
वेद पुराणों का है कहना सुख सेवा से आता है। 
गौमाता की सेवा कर लो पग में शीश झुकाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..

सतयुग में पार लगाया था कलयुग में पार लगाएगी।
महानरक की वैतरणी से पार गाय करवाएगी। 
पर तारण के हित हेतु ही नरक भोगती आई है। 
रही भटकती, कचरा खाती, और कहने को माई है।
कामधेनु है कामधेनु पर गुंजन दया दिखाओ।
हिंदू हो हिन्दू होने के हित में कदम बढ़ाओ…..

— गुंजन अग्रवाल अनहद

गुंजन अग्रवाल

नाम- गुंजन अग्रवाल साहित्यिक नाम - "अनहद" शिक्षा- बीएससी, एम.ए.(हिंदी) सचिव - महिला काव्य मंच फरीदाबाद इकाई संपादक - 'कालसाक्षी ' वेबपत्र पोर्टल विशेष - विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं व साझा संकलनों में रचनाएं प्रकाशित ------ विस्तृत हूँ मैं नभ के जैसी, नभ को छूना पर बाकी है। काव्यसाधना की मैं प्यासी, काव्य कलम मेरी साकी है। मैं उड़ेल दूँ भाव सभी अरु, काव्य पियाला छलका जाऊँ। पीते पीते होश न खोना, सत्य अगर मैं दिखला पाऊँ। छ्न्द बहर अरकान सभी ये, रखती हूँ अपने तरकश में। किन्तु नही मैं रह पाती हूँ, सृजन करे कुछ अपने वश में। शब्द साधना कर लेखन में, बात हृदय की कह जाती हूँ। काव्य सहोदर काव्य मित्र है, अतः कवित्त दोहराती हूँ। ...... *अनहद गुंजन*

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