हाइकु/सेदोका

एक कोना बचाए रखने की जरूरत है

मन के आंगन में,
एक कोना शांत रहे,
सपनों की छाँव।

भीड़ के बीच भी,
थोड़ी सी तन्हाई हो,
खुद से मुलाकात।

शोर से दूर कहीं,
खामोशी का संगीत,
दिल को सहलाए।

दिन की भागदौड़,
थककर जब रुक जाए,
कोना मुस्काए।

यादों की महक,
धीरे-धीरे बहती हो,
मन भीग जाए।

कुछ पल अपने हों,
बिन किसी अपेक्षा के,
सुकून मिल जाए।

सहेजे हुए लम्हे,
जीवन की पूंजी बनें,
आशा जगाएं।

एक दीप जलता,
अंदर ही अंदर कहीं,
राह दिखाता।

उस छोटे कोने में,
जीवन फिर खिल उठे,
नव ऊर्जा आए।

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक "गुलशन"

पिता- स्व0 बृज बहादुर पाण्डेय जन्म तिथि- 25-06-1963 शिक्षा- बी0ए0एम0एस0 , डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी डिप्लोमा इन हर्बल मेडिसिन सम्प्रति- प्रभारी चिकित्सा अधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बहराइच (उत्तर प्रदेश) सम्पर्क- उत्तरी क़ानूनगोपुरा बहराइच (उ0प्र0) पिन-271801

Leave a Reply