एक कोना बचाए रखने की जरूरत है
मन के आंगन में,
एक कोना शांत रहे,
सपनों की छाँव।
भीड़ के बीच भी,
थोड़ी सी तन्हाई हो,
खुद से मुलाकात।
शोर से दूर कहीं,
खामोशी का संगीत,
दिल को सहलाए।
दिन की भागदौड़,
थककर जब रुक जाए,
कोना मुस्काए।
यादों की महक,
धीरे-धीरे बहती हो,
मन भीग जाए।
कुछ पल अपने हों,
बिन किसी अपेक्षा के,
सुकून मिल जाए।
सहेजे हुए लम्हे,
जीवन की पूंजी बनें,
आशा जगाएं।
एक दीप जलता,
अंदर ही अंदर कहीं,
राह दिखाता।
उस छोटे कोने में,
जीवन फिर खिल उठे,
नव ऊर्जा आए।
— डॉ. अशोक
