कविता

ग्रीष्म ऋतु का आगमन

हुआ ग्रीष्म ऋतु का आगमन बढ़ रहा रवि का ताप,
देखो बदले-बदले से हैं मौसम के मिजाजी आलाप,
तेज ठंडी हवाओं ने धारा अब उष्णता का नव रूप,
तन-मन को चुभने लगी है दोपहर की कड़कती धूप ।

प्रचंड गर्मी के है आसार रखना होगा विशेष ध्यान,
भीषण ताप से रहना होगा हमें सचेत व सावधान,
स्कूलों की हो गई छुट्टियॉं नौ तपा का होगा आगमन,
इस बारी दो जेठ माह अधिक महीने का शुभागमन ।

दिन हो गए थोड़े लंबे सूरज जगने लगा है अब जल्दी,
सूखने लगे है चिलचिलाती धूप से तरूवर पोखरे नदी,
वृक्ष लगाओ धरती पर बना रहे हरीतिमा का प्रभाव,
प्राणियों को मिले शुद्ध पर्यावरण मौसमी रख-रखाव ।

गर्मी की तीव्र मार से हो सुरक्षा स्वस्थ रहे हर प्राणी,
दिन में वृक्षों को जल पशु-पक्षियों को दे दाना पानी,
पानी की कमी शरीर में न हो फलों का रस लें ताजा,
आए आम फालसा खिरनी लीची तरबूजा खरबूजा ।

शिकायत नहीं स्वागत करें हर मौसम का रखे परहेज,
मौसम के अनुरूप ही तन-मन को यूॅं रखें स्वस्थ सहेज,
हर मौसम की अपनी अलग खूबसूरती अलग है चाव,
जीवन का “आनंद” तो स्वीकारना व मनस शुद्ध भाव ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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