सत्कर्मों से भर लें जीवन का घड़ा
कठिनाइयों से लड़ना होगा
धैर्य नहीं हमको खोना होगा।
बिना विचारे कोई कार्य न करें,
चलें हमेशा बिना सहारे ही ।
मन से कभी भी हार न माने,
हम सब अपनी ताकत पहचाने।
हाथ मदद के लिए जो बढ़ाऍं ,
उसका सहारा हम भी बन जाएं।
साहस मन में भरना ही होगा,
सत्कर्मों से भर लें जीवन का घड़ा।
आंख मूँदकर न करें भरोसा,
धोखा नहीं तो खाना ही होगा।
बाँहों की पतवार बना लो,
अपनी नौका ख़ुद पार लगा दो।
राह अभी से चुननी होगी,
संयम से कार्य करना ही होगा।
आओ समाज का बनें नगीना,
गर्व से भर जायेगा अपना सीना।
दीनों का हम बनें हमेशा सहारा,
मानवता हो नित धर्म हमारा ।
सेवा से भरी हो हमारी भावना,
श्रद्धापूरित सफल हो साधना ।
पाप कर्म से हमको बचना होगा,
वाणी में माधुर्य लाना ही होगा।
— कालिका प्रसाद सेमवाल
