विज्ञान

विज्ञान की उड़ान: 12 वर्षों में बदलता भारत

किसी भी राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त आधार विज्ञान और प्रौद्योगिकी होती है। जिस देश का वैज्ञानिक आधार मजबूत होता है, वह आर्थिक, सामाजिक और सामरिक रूप से भी सशक्त बनता है। पिछले 12 वर्षों में भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इन उपलब्धियों ने न केवल भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। आज विज्ञान प्रयोगशालाओं की सीमाओं को पार कर समाज के हर क्षेत्र तक पहुँच चुका है और भारत के विकास का प्रमुख चालक बन गया है।

भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की चर्चा अंतरिक्ष कार्यक्रम के बिना अधूरी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पिछले वर्षों में कई ऐतिहासिक सफलताएँ अर्जित की हैं। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला देश बना दिया। मंगलयान मिशन ने कम लागत में अंतरिक्ष अनुसंधान की नई मिसाल स्थापित की। आदित्य-एल1 मिशन ने सूर्य के अध्ययन में भारत की भागीदारी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इन उपलब्धियों ने न केवल विश्व को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि देश के युवाओं में विज्ञान के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी विज्ञान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने स्वदेशी टीकों का विकास कर आत्मनिर्भरता का परिचय दिया। विशाल टीकाकरण अभियान ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक और प्रशासनिक क्षमता का एहसास कराया। इसके अलावा टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएँ, जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक अनुसंधान ने चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया है।

कृषि क्षेत्र में विज्ञान की भूमिका और भी व्यापक हुई है। आधुनिक बीज, मौसम पूर्वानुमान, ड्रोन तकनीक, मिट्टी परीक्षण और उपग्रह आधारित निगरानी ने किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद की है। वैज्ञानिक अनुसंधान के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हुए हैं। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती के लिए भी विज्ञान महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

डिजिटल क्रांति भारत की वैज्ञानिक प्रगति का एक और महत्वपूर्ण आयाम है। इंटरनेट, मोबाइल तकनीक, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस ने नागरिकों और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। आज गाँवों में रहने वाला व्यक्ति भी ऑनलाइन बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकता है। डिजिटल इंडिया अभियान ने तकनीक को आम जनता के जीवन का अभिन्न हिस्सा बना दिया है।

पिछले 12 वर्षों में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवाओं ने नए प्रयोग किए हैं। देश में हजारों तकनीकी स्टार्टअप उभरे हैं, जिन्होंने रोजगार सृजन के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति को मजबूत किया है।

ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में भी भारत ने विज्ञान के माध्यम से नई दिशा प्राप्त की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास ने भारत को टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर किया है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आपदा प्रबंधन में भी विज्ञान का योगदान उल्लेखनीय रहा है। आधुनिक मौसम विज्ञान, उपग्रह निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों ने चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लाखों लोगों की जान बचाने में सहायता की है। इससे यह सिद्ध होता है कि विज्ञान केवल खोज और आविष्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा और कल्याण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी पिछले वर्षों में नए अवसर विकसित हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित किया है। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में नई प्रयोगशालाओं और अनुसंधान परियोजनाओं ने युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज में विकसित करने के प्रयास भी तेज हुए हैं।

आज भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में विज्ञान और तकनीक की भूमिका निर्णायक होगी। अंतरिक्ष से लेकर स्वास्थ्य, कृषि से लेकर डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा से लेकर पर्यावरण तक, हर क्षेत्र में विज्ञान भारत के विकास की नई कहानी लिख रहा है।

पिछले 12 वर्षों की यात्रा यह दर्शाती है कि जब विज्ञान को राष्ट्रीय विकास और जनकल्याण से जोड़ा जाता है, तो वह परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन बन जाता है। विज्ञान की यह उड़ान केवल तकनीकी उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे भारत की कहानी है जो ज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता के बल पर विश्व मंच पर नई पहचान बना रहा है। आने वाले वर्षों में यह वैज्ञानिक उड़ान भारत को और अधिक समृद्ध, सक्षम और विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

— डॉ. विजय गर्ग

*डॉ. विजय गर्ग

शैक्षिक स्तंभकार, मलोट