ज्ञान चुनो, बवाल नहीं
“कलम” पकड़ो, मशाल नहीं, ज्ञान चुनो, बवाल नहीं,
तुमसे कल का सूरज है, तुम “राजनीतिक ढाल” नहीं।
सत्ता हो या फिर विपक्ष, दोनों ही करें विचार-विमर्श,
छात्र केवल मोहरा बनें, यह लोकतंत्र का नहीं है हर्ष।
कक्षा की चौखट-ग्रंथ का मान, ये भारत की पहचान,
प्रश्न उठाना अधिकार हैं, न बने वह नफ़रत की तान।
पेपर लीक हो, शिक्षा पीर, उस पर हो गंभीर तदबीर,
वाद-विवाद हो तथ्य सहित, नहीं हो नारों की लकीर।
युवा शक्ति राष्ट्र की आस, उनमें बसें भविष्य प्रकाश,
राजनीति यदि करनी है, पहले सीखो “सेवा” विश्वास।
न बनों किसी का हथियार, देश का वे सच्चा आधार,
ज्ञान, विवेक, सत्य के पथ पे, ये हर पीढ़ी के संस्कार।
— संजय एम तराणेकर
