सोनम बेवफा
सोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान।
छल के रिश्ते टूटते, खो जाता सम्मान॥
मीठे-मीठे बोल थे, मन में छिपा प्रपंच।
विश्वासों की डाल पर, सजा खूब था मंच॥
सच का जब पर्दा उठा, टूटा हर अरमान—
सोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान॥
धन-दौलत की चाह में, बदले कितने रंग।
स्वार्थों की इस दौड़ में, फीके पड़े उमंग॥
लोभ जहाँ घर कर गया, मिट जाता ईमान—
सोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान॥
प्रेम नहीं व्यापार है, समझो इसका मोल।
झूठ कभी टिकता नहीं, चाहे लाखों बोल॥
सच्चे मन का प्रेम ही, होता है वरदान—
सोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान॥
‘सौरभ’ जीवन दे रहा, हर पल नई सीख।
सच्चे रिश्ते ही सदा, बनते मन की भीख॥
छल करने वाले रहें, जग में सदा अजान—
सोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
