कविता

द्रष्टा

आँखों से आँसु क्यों झराऊँ
थोडे दिन का इंतजार और
बारिश आ जाएँगा तो
मैं तो कपड़ा सुखाने के
तार के जैसे बंधी हुई हूँ
इस डाल से उस डाल में
सुना मैदान में
गर्म सांसों के बीच

नीरव में दिए थे तुम
कुछ मुहूर्त आश्वासन के
कहांँ ले सकी मैं
‘सब कुछ तेरा है’
बोलने के बाद
मुट्ठी भर संकोच कहाँ है?
सचमुच अब कहाँ है
वो आंँसू
वो आहें

कभी कभी अनुभव होता है
उस हवा को ,
जिसमें है
गजराज का विश्वास
हिरनी की प्रार्थना
पता है मुझे , तुम आ जाते हो
मगर आज
क्यों मिल नहीं रहे हो
रूप या अरूप में

कहाँ हो तुम
क्षीर सागर में
हिमालय में
या किसी पत्थर में
में तो खिंच रखा हूँ तुम्हें
अपने विश्वास में

केवल एक नीरव द्रष्टा में
बदलने नहीं दूँगी तुम्हें ,
देखो उसे
टूटे हुए पंख में
छटपटाती चिड़िया
सचमुच तुम हो न
आयोगे …….. कैसे….
उम्मीदों में …..
या …. आँसूओं में !

— पारमिता षड़ंगी

पारमिता षड़ंगी

ओड़िआ साहित्य जगत म एक सुपरिचित नाम । वह अपनी आँचलिकता में सशक्त स्त्री-कथाकार एवं कवयित्री ही नहीं, कुशल ओड़िआ भाषानुवादक भी हैं। नारी मनस्तत्व की विश्लेषण, सूक्ष्म अवबोध की अन्वेषण तथा एक बलिष्ठ कहानी के आधार उनकी कहानियों को अलग परिचय देते हैं। जीवनवादी कहानीकार होते हुए भी पारमिता की कविताएँ चेतना और मानसिकता को खूब प्रभावित करती हैं। हिन्दी और ओड़िआ भाषा में कहानी, कविता लेखन में उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अब तक उनकी 7 कहानी-संग्रह 5 कविता-संग्रह और 11 अनुवाद-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। पारमिता की रचनाएँ वागर्थ, आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य, भाषा ,नूतन कहानियाँ, देशज, देशधारा, विश्वगाथा, कृति बहुमत, माटी ,कथाक्रम, कथारंग, अंतरंग, पाठ, युगवार्त , परिंदा, व्यंजना आदि अनेक सुप्रसिद्ध पत्रिका में प्रकाशित हुई होने के साथ साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों और विदेश में भी प्रकाशित हुई हैं। उनकी रचनाओं का बंगाली, राजस्थानी, मैथिली ,पंजाबी, गुजराती, मराठी, तमिल, ओड़िआ और इंग्लिश भाषा में अनुवाद किया गया है। पारमिता को उनके कहानी-संग्रह 'संबित के पास जब मैं नहीं थी' के लिए महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी की तरफ से पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुम्बई मो -9867113113

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