मुक्तक/दोहा

स्वच्छंद मुक्तक

राज़ और पहचान

हमने जब से तेरे राज़ जाने,
ज़िंदगी के अस्ल अक्स पहचाने।
धोखे से जो बढ़ते रहे आगे,
अक़्ल आई तो वे शख़्स पहचाने।।

वजूद

अप्रत्यक्ष रहकर कमाते रहे,
प्रत्यक्ष होकर दिखाने आये हो।
ज़माने ने जब पहचाना नहीं,
तो अपना वजूद जताने आये हो।।

आधार

पाटों ने नदी को, जड़ों ने पेड़ों को,
बिखरने और उखड़ने नहीं दिया।
अरे, विश्वास करो—यही वे साधन हैं,
जिन्होंने उनका रूप सँवार दिया।।

मशक्कत

मशक्कत के बिना
मंज़िल मुक़द्दर में नहीं आती।
वहाँ जीत कैसी,
जहाँ बाज़ी कभी हारी नहीं जाती।।

— पंकज नैथानी ‘सिद्धा’

पंकज नैथानी

श्री पंकज नैथानी को इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, आगरा से सांख्यिकी विषय में एम० फिल० की डिग्री प्राप्त है। वे अर्थ एवं सांख्यिकी सेवा के 1992 बैच के अधिकारी हैं। उनका 33 वर्षों का शासकीय अनुभव अत्यन्त व्यापक और विविध है। उन्होंने उत्तराखंड में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय एवं आई० टी० डेवलपमेंट एजेंसी प्रारम्भ करने तथा विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित ई-गवर्नेंस परियोजना की पी० एम० यू० और सार्वजनिक-निजी भागीदारी सेल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारत निर्वाचन आयोग के स्वीप कार्यक्रम हेतु उत्तराखंड के डिप्टी सी० ई० ओ० रह चुके हैं। वे उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग के प्रथम सचिव भी रहे। हाल ही में उन्होने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी के ग्रामीण अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर का अपना कार्यकाल पूरा किया, जिसके उपरान्त वे वर्तमान में अपने विभाग में अपर निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। वे मूलतः एक शोधकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जिनके कई शोध-पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हैं और जिन्होने विभिन्न पुस्तकों का संपादन भी किया है।

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