उड़ान
नारी हूँ मैं जयघोष लिखूँ सफलता का।
पद प्रतिष्ठा गान लिखूँ स्वावलंबन का।।
बाहों में आकाश भर लूँ, जिद जुनून है।
जीत का परचम लहरा दूँ, हिय सुकून है।।
स्वप्न सतरंगी नयन सजाती बढ़ती आगे।
घर-आँगन में खुशियां, नेह के बुनती धागे।।
भर ऊँची उड़ान देश का मान बढाती।
सबला हूँ मैं आज, अपने सुर सजाती।
