कुण्डली/छंद

वसुंधरा 

अभिलाषा है मित्र, सजाऊँ वसुंधरा को।

प्रतिभा का सम्मान, सहेजूँ ऋतंभरा को।

हरे भरे हो वृक्ष, जीव आनंदी सारे।

शिव शंकर की भक्ति, नाथ भव पार उतारे।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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