कुण्डली/छंद वसुंधरा *चंचल जैन 14/08/202614/08/2026 0 Comments अभिलाषा है मित्र, सजाऊँ वसुंधरा को। प्रतिभा का सम्मान, सहेजूँ ऋतंभरा को। हरे भरे हो वृक्ष, जीव आनंदी सारे। शिव शंकर की भक्ति, नाथ भव पार उतारे।