कुण्डली/छंद

देहरी

आभासी हो प्रेम, परख कर बिटिया बढ़ना।

बिना लिए आशीष, देहरी पार न करना।।

दो कुल की रख लाज, बंध हो पावन प्यारा।

खिले प्रणय शुभ पुष्प, बाग महके सुखकारा।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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