देहरी
आभासी हो प्रेम, परख कर बिटिया बढ़ना।
बिना लिए आशीष, देहरी पार न करना।।
दो कुल की रख लाज, बंध हो पावन प्यारा।
खिले प्रणय शुभ पुष्प, बाग महके सुखकारा।।
आभासी हो प्रेम, परख कर बिटिया बढ़ना।
बिना लिए आशीष, देहरी पार न करना।।
दो कुल की रख लाज, बंध हो पावन प्यारा।
खिले प्रणय शुभ पुष्प, बाग महके सुखकारा।।