सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तां हमारा गौरव को अमर करना है
इतिहास की विरासत लेकर, भविष्य की ओर बढ़ना है,
तिरंगे की ऊँची छाया में, नया हिंदुस्तान गढ़ना है,
2047 केवल तारीख नहीं, हर युवा का सपना बनना है,
सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तां हमारा गौरव को अमर करना है।
लाल किले की प्राचीर से फिर, तिरंगा आसमान सजाएगा,
वंदे मातरम् की गूंज से, हर भारतवासी मुस्काएगा,
बलिदानों की पावन गाथा, फिर इतिहास हमें बताएगा,
अस्सीवें स्वतंत्रता दिवस पर, भारत नया संकल्प उठाएगा।
वंदे मातरम् के डेढ़ सौ वर्ष, राष्ट्रगान-सा स्वर लाएंगे,
अमेरिका के इंडिया डे तक, भारत के रंग छाएंगे,
सारे जहाँ से अच्छा भारत, दुनिया को फिर सुनाएंगे,
माटी से लेकर अंतरिक्ष तक, तिरंगे की शान बढ़ाएंगे।
उत्सव के बीच युवा पूछे, मेरे सपनों का क्या होगा?
शिक्षा, रोजगार और अवसर से, मेरा कल कब रोशनहोगा?
2047 का विकसित भारत, क्या मेरा भी सपना होगा?
लाल किले से निकला संकल्प, क्या धरती पर सच होगा?
युवा हाथों में कौशल हो, आँखों में नव-उड़ान हो,
विज्ञान, तकनीक और श्रम से, भारत की नई पहचान हो,
किशन न्याय, समानता, अवसर मिले, सपनों क़ा सम्मान हो,
तब अमृतकाल की हर सुबह, भारत का स्वर्णिम गान हो।
— किशन सनमुखदास भावनानी
