निमीलन
विधा- कविता
शीर्षक- निमीलन
निमीलन की एक घड़ी में,
जीवन जीवंत हो गया,
ध्यान लगा अंतर्मन में,
थकान का अंत हो गया।
अनकहे सपने दिखने लगे,
मन का कोना हर्ष गया,
पलकों की इस छाँव तले,
खुशियों का डेरा सरस गया।
थम जाता है बाहर शोर,
भीतर बजने लगती शहनाई,
हर धड़कन कुछ कहने लगती,
यादों में निखर गई तन्हाई।
निमीलन है सुकून की छांव,
कभी प्रार्थना कभी निर्मल आनंद,
कभी अर्पण, कभी समर्पण,
मायूसी की गति हो जाती मंद।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
