कविता

निमीलन

विधा- कविता
शीर्षक- निमीलन

निमीलन की एक घड़ी में,
जीवन जीवंत हो गया,
ध्यान लगा अंतर्मन में,
थकान का अंत हो गया।

अनकहे सपने दिखने लगे,
मन का कोना हर्ष गया,
पलकों की इस छाँव तले,
खुशियों का डेरा सरस गया।

थम जाता है बाहर शोर,
भीतर बजने लगती शहनाई,
हर धड़कन कुछ कहने लगती,
यादों में निखर गई तन्हाई।

निमीलन है सुकून की छांव,
कभी प्रार्थना कभी निर्मल आनंद,
कभी अर्पण, कभी समर्पण,
मायूसी की गति हो जाती मंद।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244