कविता

स्वाधीनता दिवस

निहित स्वार्थों में ही न लगे रहें हम
इतना ध्यान अवश्य धरना है
बड़ी मुश्किल से मिली यह आजादी
इसको हमें सम्भाल कर रखना है।

लाखों लोगों ने प्राण गंवाए
जब करोड़ों लोग हुए विस्थापित
तब जाकर कहीं मिली स्वाधीनता
और स्वराज्य हुआ स्थापित।

आठ सौ सालों का विदेशी शासन
अनगिनत जुल्म और सितम सहे
हुई लूटपाट, हिंसा और उत्पीड़न
तमाम किस्से रह गये अनकहे।

बलिदान उनका व्यर्थ न जाने देंगे
आओ हम मिलकर यह शपथ लें
राष्ट्र की सुरक्षा को रखेंगे सर्वोपरि
देश भक्ति की हुंकार भरे ।

ध्यान रहे
हमारी हर छोटी- बड़ी गतिविधि पर
शत्रु पैनी निगाह गड़ाए बैठा है
कैसे विकास मार्ग अवरुद्ध हो जाए
हर समय बस उसकी यही चेष्टा है।

कभी आर्थिक प्रतिबंध लगाकर
तो कभी अनावश्यक धौंस जमाकर
अपनी शर्तें हम पर थोपना चाहे
जानबूझकर असंतोष फैलाकर।

आपसी एकता है समय की मांग
एकजुटता बरकरार रखनी होगी
गर भारत को बनाना है समृद्धशाली
समावेशी नीति धारण धरनी होगी।

मिटाना होगा जड़ से भ्रष्टाचार
न्याय प्रणाली करनी होगी दुरूस्त
‌लेने पड़ेंगे देश को कठोर फैसले
क्रियान्वयन करना पड़ेगा चुस्त ।

मना रहे अस्सीवां स्वतंत्रता दिवस
है सबके लिए यह गौरव के क्षण
लहराता रहे हमारा तिरंगा प्यारा
और स्वाधीनता रहे सदा अक्षुण्ण।

दिन -प्रतिदिन बढ़े भारत का मान
विश्व में बने हमारी विशिष्ट पहचान
कृषि व उद्योग सब फले-फूलें
बढ़ती जाए हमारी आन,बान,शान।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई