हर घर तिरंगा लहराएंगे
विधा- कविता
शीर्षक- हर घर तिरंगा लहराएंगे
ध्वज प्रतीक है राष्ट्र का,
हम इसकी शान बढ़ाएंगे,
साहस के पुतले बनकर,
हर घर तिरंगा लहराएंगे।
फिर न हमारी आजादी पर,
पांव पड़ें गद्दारों के,
फिर न हमारी सीमा पर हों,
डेरे खूनी सायों के।
नई पौध के नन्हे अंकुर,
बन महान दिखलाएंगे,
हममें से कोई राणा होंगे,
कोई वीर शिवा बन जाएंगे।
नन्हे-नन्हे नौनिहाल हम,
जग-दर्पण महकाएंगे,
छोटे हैं हम फिर भी जग में,
काम बड़े कर जाएंगे।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
