बाल कविता

हर घर तिरंगा लहराएंगे

विधा- कविता
शीर्षक- हर घर तिरंगा लहराएंगे

ध्वज प्रतीक है राष्ट्र का,
हम इसकी शान बढ़ाएंगे,
साहस के पुतले बनकर,
हर घर तिरंगा लहराएंगे।

फिर न हमारी आजादी पर,
पांव पड़ें गद्दारों के,
फिर न हमारी सीमा पर हों,
डेरे खूनी सायों के।

नई पौध के नन्हे अंकुर,
बन महान दिखलाएंगे,
हममें से कोई राणा होंगे,
कोई वीर शिवा बन जाएंगे।

नन्हे-नन्हे नौनिहाल हम,
जग-दर्पण महकाएंगे,
छोटे हैं हम फिर भी जग में,
काम बड़े कर जाएंगे।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244