कुछ मुक्तक- 46
कुछ मुक्तक- 46
1.
उड़ान
जितनी चाहो भरो #उड़ान,
मन में तनिक न हो अभिमान,
नजर धरा पर, ध्यान लक्ष्य पर,
यही है गुण जो बनाए महान।
लीला तिवानी
2.
अभिव्यक्ति
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बहुत जरूरी है,
पर स्वतंत्रता स्वतंत्रता है, स्वच्छंदता नहीं,
अपने-अपने धर्म को मानना स्वतंत्रता है,
आजादी अभिव्यक्ति की बेलगामता नहीं।
3.
मन के विचार
मन के विचार लिखने बैठूं, सोच में पड़े कलम,
क्या लिखूं, किस विधा में लिखूं, कहाँ करूं खत्म,
मन की भावनाओं को सच्चाई से व्यक्त करूं,
या कटु सत्य से किनारा करूं, दोनों ही हैं अगम!
लीला तिवानी
4.
भारत माता
वीरों के बलिदानों की गाथा,
भारत माता खुद गाती है,
उनके साहस को समर्पित हमारी,
कलम भी शीश नवाती है।
लीला तिवानी
5.
आजादी
सिर पर कफन बांधकर, चलते मां के लाल,
आजादी अक्षुण्ण रखने को, देश के रखपाल,
बदन पर तिरंगा लपेटे, आते जब अपने द्वार,
गर्व से तब भारत मां कहती, अमर हो गए लाल।
लीला तिवानी
6.
भारत माँ
धन्य हैं माँएं-पत्नियां-बहिनें, जो खुद भी जांबाज हैं,
टीका लगा रण में हैं भेजतीं, कहतीं तुम पर नाज है,
की रक्षा करें हम, मुट्ठी तानकर बढ़ते जाएं,
भारत माँ रक्षित है तब ही, देश का कल और आज है।
लीला तिवानी
7.
आँसू
ये नीर नहीं है, #आँसू हैं,
जो इन आँखों से बहते हैं,
क्या वही पुराने लोग हैं जो,
सदियों से देश में रहते हैं।
लीला तिवानी
8.
आँखें
कभी श्वेत-सी दिखती हैं ये तेरी प्यारी #आँखें,
ये तेरे साफ दिल की झलक निश्चय ही होगी,
या कि रंग चम्पा का चुराया तेरी आँखों ने,
धवलता दुग्ध की इससे बढ़कर तो नहीं होगी!
लीला तिवानी
9.
ईश्वर
ईश्वर की लीला अगम-अपार,
कैसे पाएं उसका पार!
हर पल मन में नाम प्रभु का,
नमन अगम को बारंबार।
लीला तिवानी
10.
अगम
अगम नदी जग विकट है धार,
कौन संभाल सके पतवार!
अटक न जाए बीच मझधार,
ईश्वर नाम करे भव पार।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
