कविता

तुम न आए दोबारा

विधा- कविता
शीर्षक- तुम न आए दोबारा

फूलों ने खिलना सीखा, भौंरों ने गुनगुनाना
नदियों ने बहना सीखा, तारों ने टिमटिमाना
तुम ही न सीख पाए मिलना, ये भाग्य है हमारा,
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।

हम तो तुमको भूल न पाए, तुमने भले भुलाया
आए न फिर से मुड़के, कितना तुम्हें बुलाया
सालों का चक्र घूमा यों ही करते हुए गुजारा-
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।

अपना नहीं था जग में कोई, तेरे सिवा जहां में
पाके तुम्हें गंवाया बोलो पाएं तुम्हें कहां से?
जीवन यों ही न जाए, कहीं व्यर्थ ही हमारा-
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।

भूले से भी कभी क्या तेरी, यादों में हम न आए!
क्यों प्रेम की डगर पर, ताशों के महल बनाए!
चमकेगा क्या किसी दिन, मेरा सौभाग्य-सितारा!
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244