तुम न आए दोबारा
विधा- कविता
शीर्षक- तुम न आए दोबारा
फूलों ने खिलना सीखा, भौंरों ने गुनगुनाना
नदियों ने बहना सीखा, तारों ने टिमटिमाना
तुम ही न सीख पाए मिलना, ये भाग्य है हमारा,
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।
हम तो तुमको भूल न पाए, तुमने भले भुलाया
आए न फिर से मुड़के, कितना तुम्हें बुलाया
सालों का चक्र घूमा यों ही करते हुए गुजारा-
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।
अपना नहीं था जग में कोई, तेरे सिवा जहां में
पाके तुम्हें गंवाया बोलो पाएं तुम्हें कहां से?
जीवन यों ही न जाए, कहीं व्यर्थ ही हमारा-
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।
भूले से भी कभी क्या तेरी, यादों में हम न आए!
क्यों प्रेम की डगर पर, ताशों के महल बनाए!
चमकेगा क्या किसी दिन, मेरा सौभाग्य-सितारा!
सावन बीता जाए लौट कर तुम ना आए दोबारा।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
