अन्न के दाने
अन्न हमारे जीवन का, सबसे प्यारा दान।
दाने-दाने में छिपा, किसान का अरमान॥
दादा-दादी संग चलें, आँगन में मुस्कान।
दादी दाने साफ करें, दादा दें पहचान॥
दाना-दाना बीनकर, बच्चा रखता ध्यान।
अन्न कभी ना फेंकना, यही हमारी शान॥
धरती माँ की गोद से, आया यह अनमोल।
किसान की मेहनत से, भरते घर के ढोल॥
थाली में जितना चाहिए, उतना ही हम खाएँ।
बचा हुआ जो अन्न हो, भूखे को खिलाएँ॥
अन्न बचाएँ, मान दें, खुशियाँ रहें अपार।
दाने-दाने से बने, जीवन का संसार॥
— डॉ. सत्यवान सौरभ
