गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आयेगी शाय़द क़यामत आज तो।
करने दो उसको शिकायत आज तो।।

हो गई मेहर ख़ुदा की उस पे है।
यूं नहीं होगी ज़लालत आज तो।।

चाहे कितना कर ले अपने दिल की वो।
पर नहीं होगी ज़मानत आज तो।।

बँद रहेगा बन के कैदी दिल यहांँ।
उसके दिल पर है हुकूमत आज तो।।

इश्क़ है उससे तो डर कैसा हमें।
होगी बारिश में शरारत आज तो।।

— प्रीती श्रीवास्तव

*प्रीती श्रीवास्तव

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