14 अगस्त: 1947 विभाजन दिवस
मानवता रोई थी जार जार जब हुआ देश का बंटवारा
हिंसा भी चरम पर थी अपने भाई को बनाया था चारा
लाखों लोगों की जान गई विस्थापित कितने लोग हुए
जिन्ना की जिद सबसे ऊपर जेहादी क्रूर प्रयोग हुए
200 वर्षो की गुलामी से संघर्ष किया और मुक्त हुए
गहरा जख्म रिस रहा है आतंकी सोच प्रबल दिखती
आ गया समय अब तो समझो इतिहास कलम ही है लिखती
भारत के दर्द को याद करो अब हो ना दोबारा यह गलती
15 अगस्त को याद रखो 14 अगस्त को नहीं भूलना
फिर से चारा नहीं है बनना यह कड़वा सच नहीं भूलना
गोरी गजनी के वंशज सारे फिर घात लगाए बैठे हैं
इनकी चालो में मत आना फिर से वह गलती मत करना
स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ लाती मन में खुशियां अपार
इसे मनाता पूरा भारत हर साल करता है इंतजार
हम नमन करें उन वीरों को जिनने दिलाई आजादी
बिस्मिल आजाद सुभाष भगतसिंह का पूरा भारत है कर्जदार
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव
