क्षणिका

क्षणिकाएं : शब्द श्रंखला – प्रभात

१) आते ही मंगल प्रभात की बेला
पंछी घोंसला छोड़ चले
बच्चों के लिए लाने दाना-पानी
पंख फैला, लम्बी उड़ान भरें ।

२) वातावरण में फैला कोलाहल
प्रकृति का सौंदर्य देखने लायक
सूर्य की किरणों से रोशन सवेरा
आशावादी सोच का परिचायक ।

३) बजने लगी मंदिर की घंटियां
और शुरू हो गया प्रभु का गुणगान
दिन की शुरुआत करने से पहले
चलो करें श्री हरि को प्रणाम।

४) आते ही शुभ प्रभात की बेला
बच्चे, युवा सब काम पर लग जाते
भागम -भाग भरे इस जीवन में
वृद्ध जन बेचारे अकेले पड़ जाते।

५) बड़ी संख्या में लोग टहलने आए
शुद्ध हवा का कर रहे हैं रस- पान
कुछ लगे हुए हैं दंड -बैठक में
तो कुछ करें प्राणायाम व ध्यान।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई