दिल में बस हों ये जज़्बात
(गोस्वामी तुलसीदास जयंती- 19 अगस्त 2026 विशेष)
विधा- कविता
शीर्षक- दिल में बस हों ये जज़्बात
सभी सुखी हों, रोगमुक्त हों,
मंगलमय हो सबका जीवन,
दुःख का भागी कोई बने नहीं,
आनंद-मंगल हो नित नवीन।
परहित सरिस हो ध्येय हमारा,
परपीड़ा से बचे रहें,
स्नेह-प्यार-सम्मान भाव हो,
इक-दूजे का मान रखें।
जीवन भीतर से शुद्ध हो,
सब में प्रभु का रूप दिखे,
उसकी उपासना तो भ्रम मात्र है,
मूर्ति में ही जिसको प्रभु दिखे।
चाहे कितने भी संघर्ष हों,
हौसले का हो हरदम साथ,
औरों हेतु भी जियें जगत में,
दिल में बस हों ये जज़्बात।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
