दिमागी नक्सली
दिमागी नक्सली यह नया शब्द आखिर यह होता क्या है जिसे प्रधानमंत्री जी ने 15 अगस्त को अपने भाषण के दौरान कुछ लोगों के लिए प्रयोग किया था। हम लोगों ने नक्सली, माओवादी, आतंकवादी वामपंथी आदि शब्द पहले से ही सुनते आ रहे हैं तथा सब की अलग-अलग परिभाषा भी हम लोग जानते हैं तो सवाल उठता है कि आखिर दिमागी नक्सली किसे कहते हैं जिसे मा. प्रधानमंत्री जी ने यह नया शब्द कहां से लाकर पैदा कर दिया। देवताओं और दैत्यों का संग्राम हमेशा से होता आया है और आज भी हो रहा है यह भी सत्य है कि देवता हमेशा हारते हैं दैत्य विजयी हो जाते रहे हैं किन्तु अन्तिम विजय देवताओं की ही हुई है। अब समझने की बात यह है कि जब देवता और दैत्य एक दूसरे के शत्रु होते हुए भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गये और उस मंथन के परिणाम स्वरूप 14 रत्न निकले थे मैं 11 रत्नों की चर्चा नहीं करता हूं केवल 3 रत्नों की यहां चर्चा करता हूं एक अमृत दूसरा विष, तीसरा मदिरा। अमृत को एक दैत्य जो बाद में राहु एवं केतु कहलाए सहित देवताओं ने पान किया, मदिरा दैत्यों ने पान किया किंतु विष भगवान शंकर ने विश्व कल्याणार्थ पान किया।
दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर तथाकथित जेन जी या छात्र आंदोलन के नाम पर आंदोलन होता है यह आंदोलन समुद्र मंथन का स्वरूप धारण करता है घटना सर्वविदित है चर्चा की आवश्यकता नहीं है जन्तर-मन्तर पर जो समुद्र मंथन हुआ उसमें से क्या निकला यह महत्वपूर्ण है। जन्तर-मन्तर पर जो मंथन हुआ उसमें से जो मदिरा निकला उसे तथाकथित काक्रोचों ने पान किया उसी का परिणाम इन लोगों द्वारा किया गया अभद्रतापूर्ण व्यवहार सर्वविदित है इस प्रकार का अभद्रतापूर्ण व्यवहार कोई राक्षस ही कर सकता है। जो अमृत निकला उसे धर्मेन्द्र प्रधान, अमित शाह सहित कुछ भाजपाइयों ने पान किया केवल नरेंद्र मोदी को छोड़कर क्योंकि जो हलाहल विष था उसे बाब अमरनाथ के भक्त नरेंद्र मोदी जी ने सहर्ष पहले ही पान कर लिया था जो जगजाहिर है जेन जी को क्षमा प्रदान करना किसी शिव भक्त के आचरण में ही हो सकता है।
अब आते हैं मोदी जी ने किसके लिए दिमागी नक्सली शब्द का प्रयोग किया था, यह दिमागी नक्सली है कौन इसकी परिभाषा है जो नक्सलवाद, माओवाद, आतंकवाद, वामपंथ और कांग्रेस के मिश्रित मंथन से जो पैदा होता है उसे दिमागी नक्सली कहते हैं। यह दिमागी नक्सली नक्सलवादी, माओवादी, आतंकवादी, वामपंथी और कांग्रेस से सैकड़ों गुना जहल उगलने वाले बहुत ख़तरनाक होते हैं किन्तु यह लोग गीदड़भभकी में ज्यादा विश्वास करते हैं और अल्पायु होते हैं।
जय हिन्द।।
— राजेन्द्र
