स्वप्न-सा मन
विधा- कविता
शीर्षक- स्वप्न-सा मन
स्वप्न-सा मन,
जश्न का मन,
खिल गया तो,
सुमन-सा मन।
खार-सा मन,
प्यार का मन,
मिल गया तो
सितार-सा मन।
बह रहा मन,
कह रहा मन,
जाने क्यों ये,
सह रहा मन।
तरल-सा मन,
सरल-सा मन,
हो रहा क्यों,
गरल-सा मन!
अपना-सा मन,
पराया-सा मन,
जाने क्यों होता,
कल्पना-सा मन!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
