कविता

स्वप्न-सा मन

विधा- कविता
शीर्षक- स्वप्न-सा मन

स्वप्न-सा मन,
जश्न का मन,
खिल गया तो,
सुमन-सा मन।

खार-सा मन,
प्यार का मन,
मिल गया तो
सितार-सा मन।

बह रहा मन,
कह रहा मन,
जाने क्यों ये,
सह रहा मन।

तरल-सा मन,
सरल-सा मन,
हो रहा क्यों,
गरल-सा मन!

अपना-सा मन,
पराया-सा मन,
जाने क्यों होता,
कल्पना-सा मन!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244