अंबर से बरसी प्रेम लहर
विधा- कविता
शीर्षक- अंबर से बरसी प्रेम लहर
अंबर से बरसी प्रेम लहर
तीजों में भीगी अवनि मुस्काई,
दिल-ने-दिल की बात सुनी,
फिर प्यार ने ले ली अंगड़ाई।
चारु चाँदनी बरस रही थी,
चाँदी-सी निखरी थी धरा,
रिमझिम बरसती बूँदों से भी,
निर्मल-स्नेहिल प्यार झरा।
पाकर बादल से संदेशा,
पवन चली करने मनुहार,
खुश होकर झूम उठा,
फूलों का छोटा-सा संसार।
मिलन हुआ जब नभ-धरती का,
खिल उठा हर मन का द्वार,
प्रेम लहर बन बरस पड़ा,
जीवन का मधुमय प्यार।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
