कविता

अंबर से बरसी प्रेम लहर

विधा- कविता
शीर्षक- अंबर से बरसी प्रेम लहर

अंबर से बरसी प्रेम लहर
तीजों में भीगी अवनि मुस्काई,
दिल-ने-दिल की बात सुनी,
फिर प्यार ने ले ली अंगड़ाई।

चारु चाँदनी बरस रही थी,
चाँदी-सी निखरी थी धरा,
रिमझिम बरसती बूँदों से भी,
निर्मल-स्नेहिल प्यार झरा।

पाकर बादल से संदेशा,
पवन चली करने मनुहार,
खुश होकर झूम उठा,
फूलों का छोटा-सा संसार।

मिलन हुआ जब नभ-धरती का,
खिल उठा हर मन का द्वार,
प्रेम लहर बन बरस पड़ा,
जीवन का मधुमय प्यार।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244