तितली रानी
विधा- बाल कविता
शीर्षक- तितली रानी
मैं रंग बिरंगी तितली रानी, फूलों का रस लेती हूँ,
कहते सभी सयानी हूँ, बच्चों को खुशियां देती हूँ।
चंचल-नटखट-कोमल हूँ, पंख हैं मेरे रंगरंगीले,
फूलों से रंग लेती हूँ, लाल-गुलाबी-नीले-पीले।
बच्चों के मन को बहलाती, तितली रानी हूँ कहलाती,
मुझे पकड़ने को वे लपकते, फुर्र से हूँ मैं उड़ जाती।
पल भर मैं फूलों पर टिकती, पल भर में उड़ जाती हूँ,
भौंरों के संग करती ठिठोली, संग में गाना गाती हूँ।
सिर पर मेरे दो एंटीना, इनसे सूंघती-परखती हूँ,
छः पैरों वाली हूँ मैं, इन पर बैठा करती हूँ।
रेशम जैसे कोमल पंख हैं, हाथ लगाते ही उड़ जाती,
बच्चे समझते डरती हूँ मैं, जब मैं पकड़ में नहीं आती!
फुलवारी है मेरा जीवन, फुलवारी में मैं रहती हूँ,
डंक न रखती, डरना न मुझसे, बच्चों से मैं कहती हूँ।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
