मधुकलश
विधा- कविता
शीर्षक- मधुकलश
स्नेह-सद्भावना से पूरित हो मधुकलश
अन्तर्मन के हिलकोरे ले मधुकलश,
प्रेम-सुधा से पूर्ण अक्षय रहे सदा-सर्वदा,
जीवन को मधुमय कर दे पावन मधुकलश।
ममता की मधुर छाया, पितृ-प्यार का सरमाया,
भाई-बहन के स्नेहसिक्त प्यार की शीतल छाया,
सुख-दुःख में हाथ में हाथ थामे रहता जब मीत,
मधुकलश में मधु-रस कलश की दिखती माया।
प्रगति करेंगे, पर किसी को छोटा नहीं समझें,
सरल रहेंगे, पर आत्मसम्मान से समझौता नहीं करें,
लेखनी सत्य, संवेदना और सकारात्मकता सिखाए,
प्रेम-मधु बाँटें, पर अपनी सीमाओं को भी पहचानें।
आत्मसम्मान से अपनापन, अपनेपन से धन्य जीवन,
दिल-से-दिल का सेतु बनाएं, जीवन हो मधुमय मधुबन,
कटुता के विष को छोड़ें, मन की दूरियों के बंधन तोड़ें,
क्रोध से करें किनारा, स्नेह-सुमन से महके घर-आंगन।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
