कविता

मधुकलश

विधा- कविता
शीर्षक- मधुकलश

स्नेह-सद्भावना से पूरित हो मधुकलश
अन्तर्मन के हिलकोरे ले मधुकलश,
प्रेम-सुधा से पूर्ण अक्षय रहे सदा-सर्वदा,
जीवन को मधुमय कर दे पावन मधुकलश।

ममता की मधुर छाया, पितृ-प्यार का सरमाया,
भाई-बहन के स्नेहसिक्त प्यार की शीतल छाया,
सुख-दुःख में हाथ में हाथ थामे रहता जब मीत,
मधुकलश में मधु-रस कलश की दिखती माया।

प्रगति करेंगे, पर किसी को छोटा नहीं समझें,
सरल रहेंगे, पर आत्मसम्मान से समझौता नहीं करें,
लेखनी सत्य, संवेदना और सकारात्मकता सिखाए,
प्रेम-मधु बाँटें, पर अपनी सीमाओं को भी पहचानें।

आत्मसम्मान से अपनापन, अपनेपन से धन्य जीवन,
दिल-से-दिल का सेतु बनाएं, जीवन हो मधुमय मधुबन,
कटुता के विष को छोड़ें, मन की दूरियों के बंधन तोड़ें,
क्रोध से करें किनारा, स्नेह-सुमन से महके घर-आंगन।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244