कविता

हरियाली की बहार

विधा- कविता
शीर्षक- हरियाली की बहार

सावन हो-न-हो मेरे घर हर पल सावन है,
हरियाली की बहार है,
हरियाली का गलीचा, हरियाली की दीवार है,
बसा इसमें प्यार-ही-प्यार है।

बड़े प्यार से सींचती हूँ मैं अपनी बगिया को,
यही सुखद संसार है,
इंद्रधनुष उतर आता है मानो जमीं पर जब,
कलियां खिलकर फूल बनती हैं।

खिड़की से निहारूं तो हर पल यह हरियाली,
देती है मन को सुकून,
गुनगुनाते हैं भौंरे, गाती हैं तितलियां जिन्हें है,
फूलों के रसपान का जुनून।

यह हरियाली ही है मेरे घर का अनुपम श्रृंगार,
सबको ही लुभाती है,
मैं गाऊं कोई मनभावन-सुरीला गीत नया,
हरियाली भी संग-साथ गाती है।

(मेरी फोटोग्राफी पर मेरी कविता)
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244