गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तू मुझसे रंज रख हम तुमको दुआ देंगे
हम खामोशियों से खुद को सजा देंगे।

आदत नहीं है सर दर दर झुकाने की
तुम अगर सामने आओगे सर झुका देंगे।

बिगड़े हालातों पर जोर से हंसने वालों
तुम्हें खुशी मिले तो खुद को मिटा देंगे।

मेरी कहानियां गौर से क्या पढ़ते हो
अगर कहो तो जुबां से तुम्हें सुना देंगे।

खुद को आईने में रख वफ़ा साबित कर
ये आइने तुझे सच तेरा बता देंगे।

मरीज़ ए ग़म का मसला कहां सुलझता है
हजारों ज़ख्म हैं किस किस की दवा देंगे।

— पावनी दिक्षित जानिब

*पावनी दीक्षित 'जानिब'

नाम = पिंकी दीक्षित (पावनी जानिब ) कार्य = लेखन जिला =सीतापुर