कविता

वरिष्ठ नागरिक दिवस (२१ अगस्त)

हां मैं वरिष्ठ नागरिक हूं
है आज का पूरा दिन मुझे समर्पित
बधाईयों के सन्देश आ रहे हैं
मैं भी करूं सबको धन्यवाद ज्ञापित

अनुभव से हूं मैं लबालब भरा
तमाम उतार-चढाव का भी हूं साक्षी
बिना मांगे ज्ञान बांटता फिरता हूं
थोड़ी वाह-वाह का हूं अभिलाषी।

वैसे लोग मेरा बहुत सम्मान करते हैं
मुझे सर आंखों पर धरते हैं
अक्सर मुझसे सलाह भी लेते हैं
कभी-कभी हम उन्हें अखरते हैं।

मैं भी वक्त के मुताबिक खुद को
ढालने का प्रयत्न कर रहा हूं
सीख रहा हूं आज की युवा पीढ़ी से
खुद में विश्वास भाव भर रहा हूं।

लगातार कोशिश करता हूं कि
नकारात्मकता पास न आने पाए
ज्यादा किसी से उम्मीद न रखते
बस अपने आप में मगन हो जाएं।

वैसे हम उम्र लोगों संग ही अब
‌‌ अपनी अच्छे से छनती है
समझते हैं एक दूसरे को अच्छे से
बिगड़ी बात तक यहां बनती है ।

अपनी पारी हम सबने बखूबी खेली
अब युवा कन्धों पर है सारा भार
वरिष्ठ नागरिक दिवस के मौके पर
सबको बधाई और सबका आभार।

— नवल अग्रवाल

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई