शैलजा छंद
शब्द माधुरी शीत फुहारे, हर्ष प्रमुदिता।
मीठी वाणी संबंधों में, प्रेम छलकता।।
भौरों की सुर गुंजन लहरी, मधु बरसाए।
कुहू-कुहू कर कोयल काली, गीत सुनाए।।
मंगल बंधन पुनित नेह है, बहन भ्रात का।
प्रेमिल भावों से मन चहका, मातु तात का।।
फौजी भाई भेज रही हूँ, राखी प्यारी।
प्रभुजी से अर्चन करती हूँ, हो शुभ क्यारी।।
चाटुकारिता जो करते हैं, बड़े मतलबी।
काम निकल जाए तो चढ़ता, रंग मजहबी।।
पैसे से ही रिश्ते तोले, झूठे वादे।
बिन पेंदी के हैं ढोंगी, ये शहजादे।।
