शैलजा छंद
चाटुकारिता जो करते हैं, बड़े मतलबी।
काम निकल जाए तो चढ़ता, रंग मजहबी।।
पैसे से ही रिश्ते तोले, झूठे वादे।
बिन पेंदी के हैं ढोंगी, ये शहजादे।।
चाटुकारिता जो करते हैं, बड़े मतलबी।
काम निकल जाए तो चढ़ता, रंग मजहबी।।
पैसे से ही रिश्ते तोले, झूठे वादे।
बिन पेंदी के हैं ढोंगी, ये शहजादे।।