कविता

कविता

आओ हर पल को सज़ग होकर खुशी से जिएँ

हर पल को सजग होकर जीना सीखें,
बीते कल की छाया को पीछे ही रहने दें।
आने वाले कल की चिंता में आज न खोएँ,
जो क्षण मिला है, उसे प्रेम से संजोएँ।

हर सांस में जीवन का संगीत सुनाई दे,
हर धड़कन में आशा की नई प्रीत दिखाई दे।
छोटी-सी खुशियों को भी दिल से अपनाएँ,
हर साधारण पल को उत्सव बनाकर मनाएँ।

समय की धारा कभी लौटकर नहीं आती,
गुज़री हुई घड़ी फिर हाथ नहीं आती।
इसलिए हर क्षण को अमूल्य समझकर जिएँ,
जो सामने है, उसे पूरी सजगता से जिएँ।

न शिकायतों में उलझें,न भय को पालें,
न व्यर्थ की इच्छाओं में अपने दिन ढालें।
मन शांत रखें और कर्मों में उजियारा भरें,
हर पल को सार्थक कर जीवन को निखारें।

जब अंतिम पड़ाव पर जीवन पीछे मुड़कर देखे,
तो हर बीता क्षण मुस्कुराता हुआ हमें देखे।
किशन अफसोस न रहे कि जीवन यूँ ही गुजर गया,
बस संतोष रहे,हर पल दिल से जिया गया।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया