कवि ने दी एक उम्मीद
एक बुढ़ी माँ
देर रात तक
सब्जी का एक टोकरा लिए
मोहल्ले के बीच
काफी देर तक बैठी रही
गांव से लायी थी
करेमुआ सब्जी
हरी-हरी पत्तों वाली
विटामिन से भरपूर
सेहत से भरपूर
तरह-तरह की सब्जियां
बिकती गयी
पर एक भी व्यक्ति
नहीं आया टोकरे के पास
हताशा, निराशा के बीच
धैर्य और उम्मीद भी थी
रात को एक कवि
एक कविता की तलाश में
उसी रास्ते से गुजरा
सन्नाटे में
एक बुजुर्ग को देखा
हालातों को समझ गया
कवि उम्मीद की कविता था
कोमल हृदय का कवि
एक उम्मीद को
जिंदा रखने के लिए
पूरे टोकरे की सब्जी
खरीद ली
उन पैसों से
एक जूता खरीदना चाहता था
कवि की कविता
एक उम्मीद जगाती है
कवि एक बुढ़ी मां की
उम्मीद को जिंदा रखा
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
