क्षणिकाएं : शब्द श्रंखला – तम
१) थोड़ी देर को भले खुश हो जाए
अंततः तो उसे हारना ही पड़ेगा
सूर्य की पहली किरण पड़ते ही
तम को कैसे भी भागना ही पड़ेगा।
२) सत्य के समक्ष झूठ कब तक टिके
एक दिन तो निश्चित तौर पर पिटे
होते ही मन में ज्ञान तत्व स्फुटित
अन्धकार के बादल झट-पट छटे ।
३) परीक्षा की घड़ी है, थोड़ा धैर्य रखें
वस्तुस्थिति को ठीक से जांचे-परखे
पहले भी कई बार कर चुके सामना
वक्त के साथ-साथ और भी निखरे।
४) कल फिर शान से उगेगा सूरज
फैलेगा प्रकाश और बदले की सूरत
मिट जाएगा तम का नामो-निशान
दिन बन जाएगा बेहद खूबसूरत ।
५) ज़रूरत है बस हौसला बनाए रखें
आशा का दीपक जलाए रखें
ऊपरवाला भी होगा मेहरबान
मिटेगा तिमिर, मन में विश्वास रखें।
— नवल अग्रवाल
