कविता

कविता – जब तुम उतरते हो

जब तुम उतरते हो
मेरे भीतर,
उतर आता है आकाश
उतर आती है धरती
और
बिखर जाता है – इंद्रधनुष।
महकने लगता है मुझमें –
फागुन।
तब मैं मैं नहीं रहता;
हो जाता हूँ –
मोर का नृत्य,
कोयल की कूक,
महकता पुष्प।

— महेश कुमार कुलदीप

महेश कुमार कुलदीप

स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-3, ओ.एन.जी.सी., सूरत (गुजरात)-394518 निवासी-- अमरसर, जिला-जयपुर, राजस्थान-303601 फोन नंबर-8511037804