कविता -आशा की उर्वर भूमि
सफलताकिसी संयोग की देन नहीं,वह उगती हैआशा की उर्वर भूमि पर। आशा-जो थाम लेती हैडगमगाते विश्वास का हाथ,और कहती है,चलो,
Read Moreसफलताकिसी संयोग की देन नहीं,वह उगती हैआशा की उर्वर भूमि पर। आशा-जो थाम लेती हैडगमगाते विश्वास का हाथ,और कहती है,चलो,
Read Moreजब तुम उतरते होमेरे भीतर,उतर आता है आकाशउतर आती है धरतीऔरबिखर जाता है – इंद्रधनुष।महकने लगता है मुझमें –फागुन।तब मैं
Read Moreकभी कुछ लाभ होता है कभी नुकसान होता है कहाँ सौदे का कोई तयशुदा ईमान होता है कोई दौलत
Read Moreजब भी बोलो अच्छा बोलो सागर जैसे गहरा बोलो झूठ नहीं सच बन जाएगा चाहे जितना ऊँचा बोलो
Read Moreभुलाता जा रहा है सादगी को ये क्या होने लगा है आदमी को जिधर देखो अँधेरा ही अँधेरा चलो
Read Moreख़िदमत में अपनी माँ की गुज़ारा करेंगे हम ऐसे बुलंद अपना सितारा करेंगे हम आँसू बहा के अब न खसारा
Read Moreये नहीं सच कि मुझे उससे मुहब्बत कम थी उसकी नज़रों में वफ़ाओं की ही क़ीमत कम थी टूटकर बाग़
Read Moreअगर मेरी वफाओं में मिलावट आ गयी होती यक़ीनन मेरी फ़ितरत में बनावट आ गयी होती कभी देखा जो होता
Read Moreबनाकर ज़िन्दगी अपनी बहुत दुश्वार बैठा है जिसे देखो वही इस प्यार में बीमार बैठा है मुहब्बत के अदब के
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