बाल कविता

बाल कविता – गणपति बप्पा

गणपति बप्पा आए रे,
खुशियों के रंग लाए रे।
नन्हे-मुन्ने फूल सजाएँ,
मिलकर मंगल गीत सुनाएँ।
माथे चमके मुकुट सुहाना,
प्यारा मुखड़ा बड़ा सलोना।
बड़े-बड़े हैं कान तुम्हारे,
बप्पा लगते सबसे न्यारे।
मूषक संग जब बप्पा आए,
बच्चों के चेहरे खिल जाएँ।
मोदक की खुशबू मन को भाए,
देखो! बप्पा मुस्कुराए।
दूर्वा, फूल चढ़ाएँ सारे,
गूँजें जय-जयकार तुम्हारे।
बुद्धि, ज्ञान हमें दे जाना,
सच्ची राह सदा दिखलाना।
झूठ न बोलें, बात न टालें,
मिल-जुलकर हम कदम बढ़ाएँ।
पेड़ लगाएँ, स्वच्छ रहें हम,
सुंदर अपना देश बनाएँ।
नहीं किसी से बैर करेंगे,
सबके संग हम प्रेम करेंगे।
बप्पा का आशीष जो पाएँ,
हँसते-गाते आगे जाएँ।
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया!
ज्ञान-बुद्धि का दीप जलाएँ,
भारत को हम खूब सजाएँ।

— गोपाल कौशल भोजवाल

गोपाल कौशल "भोजवाल"

नागदा जिला धार मध्यप्रदेश 99814-67300

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